आगे आगे चले है परछाईं ये तो रस्ता-शनास लगती है
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ख़ुदा की शा'इरी होती है औरत जिसे पैरों तले रौंदा गया है तुम्हें दिल के चले जाने पे क्या ग़म तुम्हारा कौन सा अपना गया है
Ali Zaryoun
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इक लड़का शब्दों का जाल बिछाता है और इक लड़की ख़्वाब पिरोने लगती है
Siddharth Saaz
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बंसी सब सुर त्यागे है, एक ही सुर में बाजे है हाल न पूछो मोहन का, सब कुछ राधे राधे है
Zubair Ali Tabish
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मुरली छूटी शंख बजा रास तजा फिर युद्ध सजा क्या पीछे क्या आगे है सब कुछ राधे राधे है
Zubair Ali Tabish
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मत पूछ कि क्या हाल है मेरा तेरे पीछे तू देख कि क्या रंग है तेरा, मेरे आगे
Mirza Ghalib
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सुना है 'मीर' को पढ़ने लगा है वो जब से बहुत उदास सा रहता है बोलता भी नहीं
divya 'sabaa'
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यूँँ तो तमाम रंग थे तस्वीर में मिरी लेकिन सियाह रंग ने बेहतर किया मुझे
divya 'sabaa'
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दयार-ए-हिज्र की तन्हा उदास रातों में रवाँ-दवाँ तिरी आवाज़-ए-पा अभी तक है
divya 'sabaa'
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ज़मीं का सिलसिला सिर्फ़ आसमाँ तक है उदासी क्या कहा जाए कहाँ तक है यहाँ से ले के अन्दाज़न वहाँ तक है अकेलापन मकाँ से ला-मकाँ तक है
divya 'sabaa'
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हमारा क़त्ल पहेली है एक इक के लिए किसी को क्या है ख़बर हम ने ख़ुद-कुशी की है
divya 'sabaa'
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