आज बीमारी ख़ुदा से आ गई ज़िन्दगी की हर हक़ीक़त खुल गई
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आज पहली दफ़ा लगा मुझ को वो ज़रा बे-वफ़ा लगा मुझ को बस बिना बात ही बिगड़ता था बेवजह ही ख़फ़ा लगा मुझ को
Sandeep Thakur
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ये ज़ुल्फ़ अगर खुल के बिखर जाए तो अच्छा इस रात की तक़दीर सँवर जाए तो अच्छा जिस तरह से थोड़ी सी तेरे साथ कटी है बाक़ी भी उसी तरह गुज़र जाए तो अच्छा
Sahir Ludhianvi
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आज इक और बरस बीत गया उस के बग़ैर जिस के होते हुए होते थे ज़माने मेरे
Ahmad Faraz
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हम को मालूम है जन्नत की हक़ीक़त लेकिन दिल के ख़ुश रखने को 'ग़ालिब' ये ख़याल अच्छा है
Mirza Ghalib
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सब इंतिज़ार में थे कब कोई ज़बान खुले फिर उस के होंठ खुले और सबके कान खुले
Umair Najmi
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ज़िन्दगी में कभी ख़ंजर आए मौत जैसे कई मनज़र आए
Meem Alif Shaz
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ज़िन्दगी में हादसे ही हादसे हैं हाल कोई कैसे पूछे दूसरे का
Meem Alif Shaz
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ज़िन्दगी महफ़िल नहीं है क़हक़हों की इस का असली नाम तो संजीदगी है
Meem Alif Shaz
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ज़िन्दगी में रोज़ इम्तिहान है न जाने क्यूँँ कुछ करो या मत करो थकान है न जाने क्यूँँ पहले लोगों की तरह हमें न मिल सका सुकून चलते फिरते ज़ेहन में दुकान है न जाने क्यूँँ
Meem Alif Shaz
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ज़िन्दगी तुझ को न जी पाए हम वक़्त ने दर्द दिया जब इतना
Meem Alif Shaz
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