आज भी रौशन है जिस के दम से ये दीन-ए-ख़ुदा मकतब-ए-इस्लाम में बस वो दिया ज़ैनब का है
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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
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किसी गली में किराए पे घर लिया उस ने फिर उस गली में घरों के किराए बढ़ने लगे
Umair Najmi
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किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा
Ahmad Faraz
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क्यूँ डरें ज़िन्दगी में क्या होगा कुछ न होगा तो तजरबा होगा
Javed Akhtar
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बिछड़ कर उस का दिल लग भी गया तो क्या लगेगा वो थक जाएगा और मेरे गले से आ लगेगा मैं मुश्किल में तुम्हारे काम आऊँ या ना आऊँ मुझे आवाज़ दे लेना तुम्हें अच्छा लगेगा
Tehzeeb Hafi
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हम कि जी से उतर गए सबके वो कि दिल में समाए जाते हैं
Almas Rizvi
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दिल सोचता है बस ये फ़राग़त के वक़्त में मिलने के तुझ सेे ख़्वाब जो देखे थे क्या हुए जो इक अदा पे जान लुटा देते थे कभी वो सारे दावेदार मोहब्बत के क्या हुए
Almas Rizvi
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दिल ए मरीज़ ने दिल से तुझे पुकारा है तू मेरी ज़ीस्त का अब आख़िरी सहारा है
Almas Rizvi
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क़ौल-ए-नबी है जो रखे ज़हरा से दुश्मनी रू-ए-ज़मीं पे चलना भी उस का हराम है
Almas Rizvi
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कोई बरसती आँखों में तुम को न पढ़ ले दोस्त बरसों इस एहतियात से रोए नहीं हैं हम
Almas Rizvi
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