आज देखा हम ने उस को ग़ैर की आग़ोश में हम सेे जिस ने कल कहा कुछ दिन अकेला छोड़ दो
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
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हज़ारों साल नर्गिस अपनी बे-नूरी पे रोती है बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदा-वर पैदा
Allama Iqbal
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तमाम उम्र हमें साथ साथ चलना है बस इतना कह के सफ़र कर लिया जुदा उस ने
Ajeetendra Aazi Tamaam
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ये शब का पहर ये सर्द फ़ज़ा जला के अलाव बैठे हैं हम
Ajeetendra Aazi Tamaam
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तुम्हारे शहर में आ कर ठिकाना ढूँढ़ते हैं हम अपने शहर में होते तो घर गए होते
Ajeetendra Aazi Tamaam
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तू आसमाँ का हसीं चाँद और मैं दीवाना मुझे तो सिर्फ़ तेरा इंतिज़ार करना है
Ajeetendra Aazi Tamaam
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वो जो ख़ुद इक गुलाब है यारो आज उस को गुलाब देना है
Ajeetendra Aazi Tamaam
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