आज फिर तेरी याद आई है आज फिर मैं उदास बैठा हूँ
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हम को दिल से भी निकाला गया फिर शहर से भी हम को पत्थर से भी मारा गया फिर ज़हरस भी
Azm Shakri
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चाँदी सोना एक तरफ़ तेरा होना एक तरफ़ एक तरफ़ तेरी आँखें जादू टोना एक तरफ़
Gyan Prakash Akul
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ये अलग बात कि ख़ामोश खड़े रहते हैं फिर भी जो लोग बड़े हैं, वो बड़े रहते हैं
Rahat Indori
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है
Allama Iqbal
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उस के लिए तुम हम से भी लड़ जाते हो और कहते हो वो मेरा कुछ लगता नहीं
Ambar
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ज़रा सी अपनी बात नहीं मिलने पे तुम यूँँ रूठे हो जैसे उलफ़त थी ही नहीं
Ambar
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सारी चीज़ों से मन भर जाता है पर इक तेरी तस्वीर पुरानी नईं होती
Ambar
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तुम्हें खोने का डर कुछ इस तरह सीने में कहता है चले जाओगे जिस दिन तुम धड़कना छोड़ दूँगा मैं
Ambar
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माना मुझ को प्यार जताना नईं आता पर ये न समझो साथ निभाना नईं आता जीवन भर के वादे कर के साथी से अगले ही पल हाथ छुड़ाना नईं आता
Ambar
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