आजकल सर्दियों का मौसम है हुस्न की मर्ज़ियों का मौसम है
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अब उदास फिरते हो सर्दियों की शामों में इस तरह तो होता है इस तरह के कामों में
Shoaib Bin Aziz
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ये वो क़बीला है जो हुस्न को ख़ुदा माने यहाँ पे कौन तेरी बात का बुरा माने इशारा कर दिया है आप की तरफ़ मैं ने ये बच्चे पूछ रहे थे कि बे-वफ़ा माने
Kushal Dauneria
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हुस्न के समझने को उम्र चाहिए जानाँ दो घड़ी की चाहत में लड़कियाँ नहीं खुलतीं
Parveen Shakir
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अब मैं समझा तिरे रुख़्सार पे तिल का मतलब दौलत-ए-हुस्न पे दरबान बिठा रक्खा है
Qamar Moradabadi
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तुझे कौन जानता था मेरी दोस्ती से पहले तेरा हुस्न कुछ नहीं था मेरी शा'इरी से पहले
Kaif Bhopali
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ज़िन्दगी ले रही मज़े मेरी मैं मज़े ज़िन्दगी के ले रहा हूँ
Saarthi Baidyanath
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तेरी उम्मीद की उम्मीद भी अब जा चुकी है मुहर्रम की तरह ये ईद भी अब जा चुकी है
Saarthi Baidyanath
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सुनो जैसे फ़लक में चाँद का होना ज़रूरी है ग़ज़ल के वास्ते साहिब मेरा होना ज़रूरी है
Saarthi Baidyanath
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तरीक़ा जैसे अलग है सभी के हँसने का उसी तरह ही अलग रोने का तरीक़ा है
Saarthi Baidyanath
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सुनो ईमान की रस्सी बहुत बारीक होती है बिना बाज़ीगरी के कोई उस पर चल नहीं सकता
Saarthi Baidyanath
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