आख़िरश वक़्त वो आ ही गया अब ज़िंदगी में तन्हा हम हो चले बाहरस भी अंदर जितना
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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किसी गली में किराए पे घर लिया उस ने फिर उस गली में घरों के किराए बढ़ने लगे
Umair Najmi
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हम को दिल से भी निकाला गया फिर शहर से भी हम को पत्थर से भी मारा गया फिर ज़हरस भी
Azm Shakri
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तपते सहराओं में सब के सर पे आँचल हो गया उस ने ज़ुल्फ़ें खोल दीं और मसअला हल हो गया
Tehzeeb Hafi
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निभाई पहले ज़िम्मेदारी अपनी फिर उस के बा'द थोड़े शौक़ पाले
Dhirendra Pratap Singh
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उस ने भी रक्खा ऑप्शन की तरह जिस की प्रायोरिटी था बनना हमें
Dhirendra Pratap Singh
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मैं उसे भूल चुका हूँ मेरे दिल बात ये याद दिलाया मत कर
Dhirendra Pratap Singh
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हर दफ़ा मुँह उतर जाता है ख़ुशियों का जब सजाता हूँ चेहरा उदासी से मैं
Dhirendra Pratap Singh
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उस को दिल में बिठा कर इल्म हुआ है यारों नूर आँखों का नहीं बढ़ता फ़क़त काजल से
Dhirendra Pratap Singh
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