आख़िरी बेंच पर यूँँ बुलाकर मुझे आई लव यूँ कहा मुस्कुरा कर मुझे
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ये मुझे चैन क्यूँ नहीं पड़ता एक ही शख़्स था जहान में क्या
Jaun Elia
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आँख में नम तक आ पहुँचा हूँ उस के ग़म तक आ पहुँचा हूँ पहली बार मुहब्बत की थी आख़िरी दम तक आ पहुँचा हूँ
Khalil Ur Rehman Qamar
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मैं चाहता था मुझ सेे बिछड़ कर वो ख़ुश रहे लेकिन वो ख़ुश हुआ तो बड़ा दुख हुआ मुझे
Umair Najmi
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ले दे के अपने पास फ़क़त इक नज़र तो है क्यूँँ देखें ज़िंदगी को किसी की नज़र से हम
Sahir Ludhianvi
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क्या ख़बर कौन था वो, और मेरा क्या लगता था जिस सेे मिल कर मुझे, हर शख़्स बुरा लगता था
Tehzeeb Hafi
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उस ने पूछा ही नहीं तब घर में आने के लिए मैं गया था पास जिस के दिल लगाने के लिए
Neeraj Nainkwal
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काग़ज़ में कविता बनकर रह जाएगी ये इक लड़की बाहों में रहने वाली
Neeraj Nainkwal
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वक़्त के साथ जो कल बदल सकते हैं आज ही मेरे दिल से निकल सकते हैं आप वापस नहीं लौटना चाहते आप बिल्कुल मेरे साथ चल सकते हैं
Neeraj Nainkwal
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तुम जो होते ख़ूब-सूरत होती और भी ज़िंदगी पर रदीफ़ों के बिना भी ग़ज़लें ग़ज़लें होती हैं
Neeraj Nainkwal
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इस लिए ख़ुद-कुशी नहीं करते बा'द तेरी ख़ुशी का क्या होगा
Neeraj Nainkwal
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