आँखें तब से रौशन हैं बोलो मैं क्या कर सकता हूँ? वो शब भर देखा था कल तुम को मैं क्या कर सकता हूँ? तुम कहती हो तुम को सुंदर केवल मैं ही कहता हूँ अब सारी दुनिया अंधी है तो मैं क्या कर सकता हूँ?
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चाँदी सोना एक तरफ़ तेरा होना एक तरफ़ एक तरफ़ तेरी आँखें जादू टोना एक तरफ़
Gyan Prakash Akul
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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ये अलग बात कि ख़ामोश खड़े रहते हैं फिर भी जो लोग बड़े हैं, वो बड़े रहते हैं
Rahat Indori
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ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है
Allama Iqbal
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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माँग नहीं भर पाया उस की दो आँखों को भर आया हूँ
Aatish Alok
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आज क़ब्रगाहों में हैं पड़े हुए जिन को लगता था ख़ुदा इक दिन आएगा बचाएगा
Aatish Alok
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कान्हा बनें आतिश भला क्योंकर कहो राधा को ही रुक्मणि बनाना है उसे
Aatish Alok
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मनाने को शहंशाह तो कभी शाह कह रही हो जो मेरी जाँ तुम मुझे इक बार अपना क्यूँ नहीं कहती
Aatish Alok
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तैरने की कश्मकश में डूबते देखा है सब को डूबने वाले को सचमुच तैरना आता है लेकिन
Aatish Alok
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