कान्हा बनें आतिश भला क्योंकर कहो राधा को ही रुक्मणि बनाना है उसे
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गले तो लगना है उस से कहो अभी लग जाए यही न हो मेरा उस के बग़ैर जी लग जाए मैं आ रहा हूँ तेरे पास ये न हो कि कहीं तेरा मज़ाक़ हो और मेरी ज़िंदगी लग जाए
Tehzeeb Hafi
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तुम उन के वा'दे का ज़िक्र उन से क्यूँँ करो 'ग़ालिब' ये क्या कि तुम कहो और वो कहें कि याद नहीं
Mirza Ghalib
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अश्कों को आरज़ू-ए-रिहाई है रोइए आँखों की अब इसी में भलाई है रोइए
Abbas Qamar
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बात ऐसी भी भला आप में क्या रक्खी है इक दिवाने ने ज़मीं सर पे उठा रक्खी है इत्तिफ़ाक़न कहीं मिल जाए तो कहना उस सेे तेरे शाइ'र ने बड़ी धूम मचा रक्खी है
Ismail Raaz
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अपने होंटों से कहो फूल को चू में हर रोज़ जब मेरे लब नहीं होंगे तो सहूलत होगी
Shahbaz Rizvi
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माँग नहीं भर पाया उस की दो आँखों को भर आया हूँ
Aatish Alok
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मनाने को शहंशाह तो कभी शाह कह रही हो जो मेरी जाँ तुम मुझे इक बार अपना क्यूँ नहीं कहती
Aatish Alok
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कहने को तो दुनिया तेरी बहुत बड़ी सी है मौला मेरे ग़म के आगे लेकिन कितनी छोटी है मौला तू भी तो हरदम केवल उस की ही सुनता रहता है दुनिया भी तेरी बिल्कुल ही तेरे जैसी है मौला
Aatish Alok
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मैं हर किसी को तेरे नाम से बुलाता हूँ बिछड़ के तुझ सेे अजब रोग लग गया है मुझे
Aatish Alok
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आज क़ब्रगाहों में हैं पड़े हुए जिन को लगता था ख़ुदा इक दिन आएगा बचाएगा
Aatish Alok
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