आँखों पर चश्मा होंठों पर तिल भी है वहीं कहीं देखो तो मेरा दिल भी है हम को एक पेपर में अव्वल आना है जो दूसरे दर्जे का है और मुश्किल भी है
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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
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हम ने उस को इतना देखा जितना देखा जा सकता था लेकिन फिर भी दो आँखों से कितना देखा जा सकता था
Farrukh Yar
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बैठे हैं चैन से कहीं जाना तो है नहीं हम बे-घरों का कोई ठिकाना तो है नहीं तुम भी हो बीते वक़्त के मानिंद हू-ब-हू तुम ने भी याद आना है आना तो है नहीं
Rehman Faris
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अब ज़रूरी तो नहीं है कि वो सब कुछ कह दे दिल में जो कुछ भी हो आँखों से नज़र आता है मैं उस सेे सिर्फ़ ये कहता हूँ कि घर जाना है और वो मारने मरने पे उतर आता है
Tehzeeb Hafi
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तू नया है तो दिखा सुब्ह नई शाम नई वर्ना इन आँखों ने देखे हैं नए साल कई
Faiz Ludhianvi
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काग़ज़ की नाव बनाते थे और उस पर भी इतराते थे अब तो छुट्टी भर है बस तब दीवाली यार मनाते थे
Shobhit Dixit
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पापा का वो हल्का वाला कुर्ता पहना कंधे पे कुछ भारी भारी सा लगता है
Shobhit Dixit
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जिन हाथों से हो कश्मीर बनाते तुम काश उसी से हर तक़दीर बनाते तुम
Shobhit Dixit
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तजरबा जितना बढ़ने लगता है आईना शक्लें पढ़ने लगता है
Shobhit Dixit
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तेरी ही यादों में पाकीज़ा होना पड़ता है उस के ख़ातिर भी इन आँखों को रोना पड़ता है तुम को तो बस मेरे ख़्वाबों में आना होता है ये सोचो मुझ को तो रातों में सोना पड़ता है
Shobhit Dixit
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