आप अपना लहू बहा कर के अपने आँसू बचा रहें हैं हम ज़िन्दगी इक मज़ाक है,जिस की जमके खिल्ली उड़ा रहें हैं हम
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इलाज अपना कराते फिर रहे हो जाने किस किस से मोहब्बत कर के देखो ना मोहब्बत क्यूँँ नहीं करते
Farhat Ehsaas
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और क्या चाहती है गर्दिश-ए-अय्याम कि हम अपना घर भूल गए उन की गली भूल गए
Jaun Elia
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यार बिछड़ कर तुम ने हँसता बसता घर वीरान किया मुझ को भी आबाद न रक्खा अपना भी नुक़्सान किया
Ali Zaryoun
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हम ने अब तक गाल बचा के रक्खे हैं क्या तुम ने भी गुलाल बचा के रक्खे हैं
Anand Raj Singh
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वो आए घर में हमारे ख़ुदा की क़ुदरत है कभी हम उन को कभी अपने घर को देखते हैं
Mirza Ghalib
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सोलह दिन पहले तक जो बस मेरी थी सोलह दिन के बा'द वही 'तौबा-तौबा'
Upendra Bajpai
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सोचा समझा इश्क़ नहीं करते हैं हम नादानों से नादानी हो जाती है
Upendra Bajpai
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साया पड़े न तुझ पे किसी बदनसीब का या'नी के मेरा साथ मुयस्सर न हो तुझे
Upendra Bajpai
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मेरी आँखों को अश्क दे बेशक मेरे होंठों को पर हँसी भी दे अब कोई हो अगरचे ऐसा हो जो मुझे वक़्त भी घड़ी भी दे
Upendra Bajpai
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ख़ुदा जाने कहाँ पे खो गया वो मेरे अपनों को मेरे साथ कर के अभी लौटा हूँ अपने बिस्तरा पर तेरी यादों से दो-दो हाथ कर के
Upendra Bajpai
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