आप भी हो ग़लत फ़हम तब से तल्ख़ियाँ जब से दरमियाँ ठहरी
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मुझे आज़ाद कर दो एक दिन सब सच बता कर तुम्हारे और उस के दरमियाँ क्या चल रहा है
Tehzeeb Hafi
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ये सोच के माँ बाप की ख़िदमत में लगा हूँ इस पेड़ का साया मिरे बच्चों को मिलेगा
Munawwar Rana
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आप की आँखें अगर शे'र सुनाने लग जाएँ हम जो ग़ज़लें लिए फिरते हैं, ठिकाने लग जाएँ
Rehman Faris
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और फिर एक दिन बैठे बैठे मुझे अपनी दुनिया बुरी लग गई जिस को आबाद करते हुए मेरे मां-बाप की ज़िंदगी लग गई
Tehzeeb Hafi
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आप की सादा दिली ख़ुद आप की तौहीन है हुस्न वालों को ज़रा मग़रूर होना चाहिए
Abbas Qamar
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ज़ख़्म तुझ को नवाज़ दूँ भी गर पर न धोखा मैं दिलरुबा दूँगा
Shan Sharma
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बन गए तल्ख़ आजकल वैसे हम सरापा कभी मोहब्बत थे
Shan Sharma
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आँसू आ कर ग़म को ऐसे धो जाते गंगा माँ धोती हैं जैसे पापों को
Shan Sharma
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लिखी थी जो तुम्हें बेनाम सी वो चिट्ठियाँ हैं कहीं थोड़ी शिकायत है कहीं कुछ अर्ज़ियाँ हैं तुम्हारे बा'द दिल में याद ठहरी और घर में जले फ़िल्टर रखे हैं और थोड़ी तीलियाँ हैं
Shan Sharma
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बा'द मुद्दत वो मिलने आते हैं ख़्वाब पहले दिखाए जाते हैं फ़ासले याद के सबब तो हैं हाँ मगर दिल बहुत जलाते हैं
Shan Sharma
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