आप क्यूँँ कर रही हैं फ़िक्र मेरी जाओ घर में भी काम होते हैं
Related Sher
ज़ेहन से यादों के लश्कर जा चुके वो मेरी महफ़िल से उठ कर जा चुके मेरा दिल भी जैसे पाकिस्तान है सब हुकूमत कर के बाहर जा चुके
Tehzeeb Hafi
206 likes
तेरे लगाए हुए ज़ख़्म क्यूँँ नहीं भरते मेरे लगाए हुए पेड़ सूख जाते हैं
Tehzeeb Hafi
200 likes
बात करो रूठे यारों से सन्नाटों से डर जाते हैं प्यार अकेला जी लेता है दोस्त अकेले मर जाते हैं
Kumar Vishwas
141 likes
मंज़िलें क्या हैं, रास्ता क्या है हौसला हो तो फ़ासला क्या है
Aalok Shrivastav
152 likes
उस को फ़ुर्सत नहीं मिलती कि पलट कर देखे हम ही दीवाने हैं दीवाने बने रहते हैं
Waseem Barelvi
151 likes
More from Harun Umar
तू तो चेहरे से भी मासूम नज़र आता है तुझ सेे ये किस ने कहा तू भी मोहब्बत कर ले
Harun Umar
1 likes
वहशत है मुझ को लम्स के रिज़्क-ए-हराम से मुझ को मेरे नसीब की रोज़ी नहीं मिली
Harun Umar
1 likes
साहिब-ए-इल्म बने फिरते हो अच्छा बतलाओ मोहब्बत क्या है
Harun Umar
1 likes
मर गए थे न हम तुम्हारे लिए और मुर्दे सुना नहीं करते
Harun Umar
1 likes
नफ़रतें वसवसे हसद किना ये ही तोहफ़े दिए हैं अपनों ने
Harun Umar
1 likes
Similar Writers
Our suggestions based on Harun Umar.
Similar Moods
More moods that pair well with Harun Umar's sher.







