aap mazlum ke ashkon se na khilwad karen ye wo dariya hain jo shahron ko nigal sakte hain
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मेरा अरमान मेरी ख़्वाहिश नहीं है ये दुनिया मेरी फ़रमाइश नहीं है मैं तेरे ख़्वाब वापस कर रहा हूँ मेरी आँखों में गुंजाइश नहीं है
Abrar Kashif
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आप की सादा दिली ख़ुद आप की तौहीन है हुस्न वालों को ज़रा मग़रूर होना चाहिए
Abbas Qamar
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ख़्बाब आँखों में बंद कर लेते बात गर दिल की चंद कर लेते आप भी हो ही जाते दीवाने गर किसी को पसंद कर लेते
Sandeep Thakur
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मुझ को इस लफ़्ज़ का मतलब नहीं मालूम मगर आप की हम्म ने मुझे सोच में डाला हुआ है
Ammar Iqbal
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इतना संगीन पाप कौन करे मेरे दुख पर विलाप कौन करे चेतना मर चुकी है लोगों की पाप पर पश्चाताप कौन करे
Azhar Iqbal
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ज़िंदगी भर यूँँ मेरे दिल को दुखाया था बहुत क़ब्र पर आया है वो मुझ से मुआ'फ़ी के लिए
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उदासी भी तो इक व्रत ही है वो भी ऐसा व्रत कि हँस लेने से भी जो टूटने वाला नहीं
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ये चाँद तुम्हारे मुक़ाबिल भी तो नहीं मैं तुम को देख के ईद मनाऊँगा
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ज़िंदगी भर मैं बोलूँगा तुझ को इश्क़ का यूँँ दग़ाबाज़ है तू
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तुम ने उन को मार गिराया वो भी तो तुम को मारेंगे
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