आप से रूठ कर हम किधर जाएँगे आप के बिन तो जैसे यूँँ मर जाएँगे दो क़दम दूर तुम सेे अगर जाएँगे तुम ही तुम बस दिखोगे जिधर जाएँगे
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उलझ कर के तेरी ज़ुल्फ़ों में यूँँ आबाद हो जाऊँ कि जैसे लखनऊ का मैं अमीनाबाद हो जाऊँ मैं यमुना की तरह तन्हा निहारूँ ताज को कब तक कोई गंगा मिले तो मैं इलाहाबाद हो जाऊँ
Ashraf Jahangeer
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मैं उस से ये तो नहीं कह रहा जुदा न करे मगर वो कर नहीं सकता तो फिर कहा न करे वो जैसे छोड़ गया था मुझे उसे भी कभी ख़ुदा करे कि कोई छोड़ दे ख़ुदा न करे
Tehzeeb Hafi
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ज़ेहन से यादों के लश्कर जा चुके वो मेरी महफ़िल से उठ कर जा चुके मेरा दिल भी जैसे पाकिस्तान है सब हुकूमत कर के बाहर जा चुके
Tehzeeb Hafi
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यूँँ जो तकता है आसमान को तू कोई रहता है आसमान में क्या
Jaun Elia
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आप क्यूँँ रोएँगे मेरी ख़ातिर फ़र्ज़ ये सारे इस ग़ुलाम के हैं दिन में सौ बार याद करता हूँ पासवर्ड सारे तेरे नाम के हैं
Aadil Rasheed
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ज़रूरत हमें हो गई है मोहब्बत हमें हो गई है जो आदत थी पहले उसे तब वो आदत हमें हो गई है
Toyesh prakash
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उन की आँखें झील नहीं हैं आकाश इन्हें बत लाएँगे डूबने वाले डूब न पाए उड़ने वाले उड़ जाएँगे
Toyesh prakash
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हाए न जाने कैसी उलझन नाग हज़ारों एक है चंदन
Toyesh prakash
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हो भले तिनका सही वो इस नदी हम को तो वो इक सहारा लगता है
Toyesh prakash
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हिरणी की सी आँख तुम्हारी हिरणी तक पे जो हैं भारी देख सके तो इनको देखो कितनी सुंदर कितनी प्यारी
Toyesh prakash
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