आप तो ज़िक्र वफ़ा की न करें बेहतर है आप को रूप बदलते हुए अक्सर देखा
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प्यार दो बार थोड़ी होता है हो तो फिर प्यार थोड़ी होता है यही बेहतर है तुम उसे रोको मुझ सेे इनकार थोड़ी होता है
Zubair Ali Tabish
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मेरी तन्हाई देखेंगे तो हैरत ही करेंगे लोग मोहब्बत छोड़ देंगे या मोहब्बत ही करेंगे लोग
Ismail Raaz
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आज हम दोनों को फ़ुर्सत है, चलो इश्क़ करें इश्क़ दोनों की ज़रूरत है, चलो इश्क़ करें
Rahat Indori
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माँग सिन्दूर भरी हाथ हिनाई कर के रूप जोबन का ज़रा और निखर आएगा जिस के होने से मेरी रात है रौशन रौशन चाँद में आज वही अक्स नज़र आएगा
Azhar Iqbal
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कोई चादर वफ़ा नहीं करती वक़्त जब खींच-तान करता है
Unknown
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वहम को क़स्दन हक़ीक़त के बराबर देखना ख़ुश्क सहरा में कभी पानी का मंज़र देखना
Arbab Shaz
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सौ अक्स अगर देखने का शौक़ है 'अरबाब' शीशे की तरह आप बिखर क्यूँँ नहीं जाते
Arbab Shaz
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ज़ख़्म भर जाए भी तो क्या हासिल दाग़ सा इक निशान रहता है
Arbab Shaz
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लगा के आग यहाँ नफ़रतों की लोग अभी सुकून ढूँढ़ रहे जा के आसमानों में
Arbab Shaz
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कुछ ख़्वाहिशें थीं बात थी जो अनकही रही अफ़सोस मुख़्तसर सी मिरी ज़िंदगी रही
Arbab Shaz
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