आप के ख़्वाब ख़ूब-सूरत थे इस लिए फ़्रेम में मढ़ाया है
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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हज़ारों साल नर्गिस अपनी बे-नूरी पे रोती है बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदा-वर पैदा
Allama Iqbal
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ज़रा ठहरो कि शब फीकी बहुत है तुम्हें घर जाने की जल्दी बहुत है ज़रा नज़दीक आ कर बैठ जाओ तुम्हारे शहर में सर्दी बहुत है
Zubair Ali Tabish
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इसीलिए तो मैं रोया नहीं बिछड़ते समय तुझे रवाना किया है जुदा नहीं किया है
Ali Zaryoun
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क्यूँ डरें ज़िन्दगी में क्या होगा कुछ न होगा तो तजरबा होगा
Javed Akhtar
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ज़िन्दगी ले रही मज़े मेरी मैं मज़े ज़िन्दगी के ले रहा हूँ
Saarthi Baidyanath
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ये माना आप से बेहतर नहीं हूँ मगर मैं खेल से बाहर नहीं हूँ
Saarthi Baidyanath
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ज़िंदगी गुदगुदी के जैसी है आप रोने लगोगे हँसते हुए
Saarthi Baidyanath
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ये सूझ- बूझ नहीं आती सिर्फ़ पैसों से बग़ैर पैसों के भी सूझ- बूझ आती है
Saarthi Baidyanath
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तुम को न देखने की क़सम खा चुके तो हैं तुम को न चाहने की क़सम कैसे खाएं हम
Saarthi Baidyanath
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