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आशिक़ दिवाना मजनूँ या पागल कहो हमें अब और हम बनें तिरे शाइ'र ये दिल करे

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ये दिल है तेरा या मेरा ख़याल कुछ भी नहीं ये शाम है या सवेरा ख़याल कुछ भी नहीं याँ इक मैं हूँ जिस को तेरा ही है ख़याल फ़क़त वाँ इक तू है जिस को मेरा ख़याल कुछ भी नहीं

Deep kamal panecha

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ये नई चादर जो लाई जा रही है तेरे बिस्तर पे बिछाई जा रही है ख़ुश है ना तू ग़ैर रिश्ते में तभी बससज ये तेरी सजाई जा रही है

Deep kamal panecha

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रात भर जगने का उस सेे पूछें सबब आप का कर के दीदार जो सोया हो

Deep kamal panecha

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क़लह ख़ामोश करने घर की मन के काले जाएँगे मुझे डस लेंगे लेकिन फिर भी बिच्छू पाले जाएँगे मिरे दुश्मन जो आ तो मैं गया ना अपनी करने पे जनाज़े को भी तेरे शानों के पड़ लाले जाएँगे

Deep kamal panecha

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हम तो वो हैं कोई हम को चाहता ही है नहीं चाहते भी हम यही है कोई हम को चाहे ही न

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