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रात भर जगने का उस सेे पूछें सबब आप का कर के दीदार जो सोया हो

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ये नई चादर जो लाई जा रही है तेरे बिस्तर पे बिछाई जा रही है ख़ुश है ना तू ग़ैर रिश्ते में तभी बससज ये तेरी सजाई जा रही है

Deep kamal panecha

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क़लह ख़ामोश करने घर की मन के काले जाएँगे मुझे डस लेंगे लेकिन फिर भी बिच्छू पाले जाएँगे मिरे दुश्मन जो आ तो मैं गया ना अपनी करने पे जनाज़े को भी तेरे शानों के पड़ लाले जाएँगे

Deep kamal panecha

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निगाहों के सागरों से पानी छलक न जाए कहीं हमारा अज़ाब-ए-दिल पे न रोने का टूट ये न जाए यक़ीं हमारा तो शोख़ी तो देखो उन की वो बस हमारे ही वास्ते हैं ऐसे वो चारा-गर बन गए हैं अब पर इलाज करते नहीं हमारा

Deep kamal panecha

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कम हो गईं ख़्वाबों से बातें आज कल शायद मिरे अंदर का मैं ही मर गया

Deep kamal panecha

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इश्क़ का बस यही तो मज़ा है हिज्र के बा'द मिलती क़ज़ा है मौत से ख़ौफ थोड़ी है, आए अब तो बे-इश्क़ ये ही रज़ा है

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