कम हो गईं ख़्वाबों से बातें आज कल शायद मिरे अंदर का मैं ही मर गया
Related Sher
अब के हम बिछड़े तो शायद कभी ख़्वाबों में मिलें जिस तरह सूखे हुए फूल किताबों में मिलें
Ahmad Faraz
95 likes
मुझे बातें नहीं तेरी मोहब्बत चाहिए थी मुझे अफ़सोस है ये मुझ को कहना पड़ रहा है
Ali Zaryoun
99 likes
कोई काँटा कोई पत्थर नहीं है तो फिर तू सीधे रस्ते पर नहीं है मैं इस दुनिया के अंदर रह रहा हूँ मगर दुनिया मेरे अंदर नहीं है
Zubair Ali Tabish
97 likes
किस ने दस्तक दी ये दिल पर कौन है आप तो अंदर हैं बाहर कौन है
Rahat Indori
141 likes
कुछ न रह सका जहाँ विरानियाँ तो रह गईं तुम चले गए तो क्या कहानियाँ तो रह गईं
Khalil Ur Rehman Qamar
164 likes
More from Deep kamal panecha
निगाहों के सागरों से पानी छलक न जाए कहीं हमारा अज़ाब-ए-दिल पे न रोने का टूट ये न जाए यक़ीं हमारा तो शोख़ी तो देखो उन की वो बस हमारे ही वास्ते हैं ऐसे वो चारा-गर बन गए हैं अब पर इलाज करते नहीं हमारा
Deep kamal panecha
1 likes
वो पड़े इस बात पे हम सेे उलझ के आज दिन में आपने कैसे तो कैसे सुब्ह दूजा चाँद देखा
Deep kamal panecha
1 likes
ये दिल है तेरा या मेरा ख़याल कुछ भी नहीं ये शाम है या सवेरा ख़याल कुछ भी नहीं याँ इक मैं हूँ जिस को तेरा ही है ख़याल फ़क़त वाँ इक तू है जिस को मेरा ख़याल कुछ भी नहीं
Deep kamal panecha
1 likes
मेरे ज़ख़्म चीख़ के बताते हाल हैं उन्हें अपने कान से नहीं जो अपने दिल से बहरे हैं खोल देता हूँ मैं उन के आगे अपने सारे राज पर उन्हें तो लगता हैं ये सारे मेरे चेहरे हैं
Deep kamal panecha
1 likes
हम तो वो हैं कोई हम को चाहता ही है नहीं चाहते भी हम यही है कोई हम को चाहे ही न
Deep kamal panecha
1 likes
Similar Writers
Our suggestions based on Deep kamal panecha.
Similar Moods
More moods that pair well with Deep kamal panecha's sher.







