आसमाँ से ग़मों की जब कभी धूप आती है तब ज़मीं तारे के अफ़साने को दोहराती है
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मैं चाहता हूँ मोहब्बत मेरा वो हाल करे कि ख़्वाब में भी दोबारा कभी मजाल न हो
Jawwad Sheikh
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धूप में निकलो घटाओं में नहा कर देखो ज़िंदगी क्या है किताबों को हटा कर देखो
Nida Fazli
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पड़ी रहने दो इंसानों की लाशें ज़मीं का बोझ हल्का क्यूँँ करें हम
Jaun Elia
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मिले किसी से गिरे जिस भी जाल पर मेरे दोस्त मैं उस को छोड़ चुका उस के हाल पर मेरे दोस्त ज़मीं पे सबका मुक़द्दर तो मेरे जैसा नहीं किसी के साथ तो होगा वो कॉल पर मेरे दोस्त
Ali Zaryoun
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परों को खोल ज़माना उड़ान देखता है ज़मीं पे बैठ के क्या आसमान देखता है
Shakeel Azmi
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ज़िंदगी इक ख़ूब-सूरत हादिसा है शक्ल मिट्टी की घड़ी बहती हवा है आँसुओं से तुम सदा दो आएगा वो हाल-ए-दिल वो जानता है वो ख़ुदा है
Raj Tiwari
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शाद-ओ-आबाद रहे सफ़्हा हर इक दिल का 'राज' इन किताबों से गुलाबों की महक आती है
Raj Tiwari
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शाख से टूट के पत्ते हवा की ओर चले जिस तरह टूटे हुए दिल ख़ुदा की ओर चले
Raj Tiwari
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मोहब्बतों का सिलसिला बदल गया वफ़ा का एक दौर था बदल गया
Raj Tiwari
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मुरव्वतन नदी की इब्तिदा थी कोहसार से जो आदतन समंदरो में जा मिली है प्यार से
Raj Tiwari
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