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आती है परेशानी तो आता है ख़ुदा याद वर्ना नहीं दुनिया में कोई तेरे सिवा याद

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ये झाँक लेती है दिल से जो दूसरे दिल में मेरी निगाह में सारा कमाल दर्द का है

Farhat Abbas Shah

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है किसी जालिम उदू की घात दरवाज़े में है या मसाफ़त है नई या रात दरवाज़े में है जिस तरहा उठती है नजरें बे-इरादा बार-बार साफ़ लगता है के कोई बात दरवाज़े में

Farhat Abbas Shah

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हर रोज़ उठाता हूँ किसी ख़्वाब की मय्यत और आप ये कहते हैं कि मातम न करूँँ मैं इक शख़्स दिखा दो मुझे हँसता हुआ दिल से गोया कि ये सब देख के भी ग़म न करूँँ मैं

Farhat Abbas Shah

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बेकार ख़यालों से लिपट कर नहीं देखा जो कुछ भी हुआ हम ने पलटकर नहीं देखा इस डर से के कट जाए न बीनाई के रेशे आँखों ने तेरी राहों से हटकर नहीं देखा

Farhat Abbas Shah

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ये दिल मलूल भी कम है उदास भी कम है कई दिनों से कोई आस पास भी कम है हमें भी यूँ ही गुजरना पसंद है और फिर तुम्हारा शहर मुसाफ़िर-शनास भी कम है

Farhat Abbas Shah

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