अविष्कार नवाचारों ने मानव ख़ुद में ठूस लिया है संयंत्रों के इस दलदल ने भाव नदी को चूस लिया है
Related Sher
तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
1279 likes
अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
221 likes
हम वो हैं जो ख़ुदा को भूल गए तुम मेरी जान किस गुमान में हो
Jaun Elia
563 likes
किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा
Ahmad Faraz
594 likes
हज़ारों साल नर्गिस अपनी बे-नूरी पे रोती है बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदा-वर पैदा
Allama Iqbal
207 likes
More from Nityanand Vajpayee
वादों से मुकर जाना तो फ़ितरत है तुम्हारी कुछ और नया खेल दिखाओ तो बने बात
Nityanand Vajpayee
0 likes
बारूदों की पौध लगा कर जड़ में ख़ुद को खाद करोगे
Nityanand Vajpayee
0 likes
वो जो पत्थर हमारे सर पे मारा फेंककर तुम ने उसी पत्थर को हम ने घर का कंगूरा बनाया है अधूरा प्यार था कोई कि इकतरफ़ा मुहब्बत थी हमारी शा'इरी ने लो उसे पूरा बनाया है
Nityanand Vajpayee
1 likes
ग़ज़ल बन कर मेरे सीने से लग जा मैं तेरा लुत्फ़ उठाना चाहता हूँ
Nityanand Vajpayee
0 likes
वतन के वास्ते क़ुर्बान होना ही तो असली ज़िंदगी है वगरना मौत के आग़ोश में सोना तो है सब को किसी दिन
Nityanand Vajpayee
1 likes
Similar Writers
Our suggestions based on Nityanand Vajpayee.
Similar Moods
More moods that pair well with Nityanand Vajpayee's sher.







