ab ke bar mil ke yun sal-e-nau manaenge ranjishen bhula kar hum nafraten mitaenge
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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
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किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा
Ahmad Faraz
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गले मिलना न मिलना तो तेरी मर्ज़ी है लेकिन तेरे चेहरे से लगता है तेरा दिल कर रहा है
Tehzeeb Hafi
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काश वो रास्ते में मिल जाए मुझ को मुँह फेर कर गुज़रना है
Fahmi Badayuni
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इतनी मिलती है मिरी ग़ज़लों से सूरत तेरी लोग तुझ को मिरा महबूब समझते होंगे
Bashir Badr
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न हों अश'आर में माअनी न सही ख़ुद कलामी का ज़रिया ही सही तुम न नवाज़ो शे'र को, न सुनाएंगे ये मेरा ज़ाती नज़रिया ही सही
Unknown
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ईद के बा'द वो मिलने के लिए आए हैं ईद का चाँद नज़र आने लगा ईद के बा'द
Unknown
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ये साल भी उदासियाँ दे कर चला गया तुम से मिले बग़ैर दिसम्बर चला गया
Unknown
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रहबर भी ये हमदम भी ये ग़म-ख़्वार हमारे उस्ताद ये क़ौमों के हैं में'मार हमारे
Unknown
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लगता है कई रातों का जागा था मुसव्विर तस्वीर की आँखों से थकन झाँक रही है
Unknown
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