रहबर भी ये हमदम भी ये ग़म-ख़्वार हमारे उस्ताद ये क़ौमों के हैं में'मार हमारे
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पास हमारे आ कर वो शर्माती है तब जा कर के एक ग़ज़ल हो पाती है उस को छूना छोटा मोटा खेल नहीं गर्मी क्या सर्दी में लू लग जाती है
Tanoj Dadhich
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अगर रक़ीब न होते तो दोस्त होते आप हमारे शौक़, ख़यालात एक जैसे हैं
Amulya Mishra
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अब दोस्त कोई लाओ मुक़ाबिल में हमारे दुश्मन तो कोई क़द के बराबर नहीं निकला
Munawwar Rana
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अगर हुकूमत तुम्हारी तस्वीर छाप दे नोट पर मेरी दोस्त तो देखना तुम कि लोग बिल्कुल फिजूलखर्ची नहीं करेंगे हमारे चंद अच्छे दोस्तों ने ये वा'दा ख़ुद से किया हुआ है कि शक्ल अल्लाह ने अच्छी दी है सो बातें अच्छी नहीं करेंगे
Rehman Faris
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माँ बाप और उस्ताद सब हैं ख़ुदा की रहमत है रोक-टोक उन की हक़ में तुम्हारे नेमत
Altaf Hussain Hali
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लगता है कई रातों का जागा था मुसव्विर तस्वीर की आँखों से थकन झाँक रही है
Unknown
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दुनिया में वही शख़्स है ताज़ीम के क़ाबिल जिस शख़्स ने हालात का रुख़ मोड़ दिया हो
Unknown
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कई जवाबों से अच्छी है ख़ामुशी मेरी न जाने कितने सवालों की आबरू रक्खे
Unknown
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एक बोसे के तलबगार हैं हम और माँगे तो गुनहगार हैं हम
Unknown
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कुछ ख़ुशियाँ कुछ आँसू दे कर टाल गया जीवन का इक और सुनहरा साल गया
Unknown
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