sherKuch Alfaaz

रहबर भी ये हमदम भी ये ग़म-ख़्वार हमारे उस्ताद ये क़ौमों के हैं में'मार हमारे

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पास हमारे आ कर वो शर्माती है तब जा कर के एक ग़ज़ल हो पाती है उस को छूना छोटा मोटा खेल नहीं गर्मी क्या सर्दी में लू लग जाती है

Tanoj Dadhich

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अगर रक़ीब न होते तो दोस्त होते आप हमारे शौक़, ख़यालात एक जैसे हैं

Amulya Mishra

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अब दोस्त कोई लाओ मुक़ाबिल में हमारे दुश्मन तो कोई क़द के बराबर नहीं निकला

Munawwar Rana

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अगर हुकूमत तुम्हारी तस्वीर छाप दे नोट पर मेरी दोस्त तो देखना तुम कि लोग बिल्कुल फिजूलखर्ची नहीं करेंगे हमारे चंद अच्छे दोस्तों ने ये वा'दा ख़ुद से किया हुआ है कि शक्ल अल्लाह ने अच्छी दी है सो बातें अच्छी नहीं करेंगे

Rehman Faris

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माँ बाप और उस्ताद सब हैं ख़ुदा की रहमत है रोक-टोक उन की हक़ में तुम्हारे नेमत

Altaf Hussain Hali

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