aisa karunga ab ke gareban ko tar tar jo phir kisi tarah se kisi se rafu na ho
Related Sher
तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
1279 likes
हम ने उस को इतना देखा जितना देखा जा सकता था लेकिन फिर भी दो आँखों से कितना देखा जा सकता था
Farrukh Yar
979 likes
शायद मुझे किसी से मोहब्बत नहीं हुई लेकिन यक़ीन सब को दिलाता रहा हूँ मैं
Jaun Elia
839 likes
किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा
Ahmad Faraz
594 likes
हम को नीचे उतार लेंगे लोग इश्क़ लटका रहेगा पंखे से
Zia Mazkoor
224 likes
More from Shaikh Zahuruddin Hatim
होली के अब बहाने छिड़का है रंग किस ने नाम-ए-ख़ुदा तुझ ऊपर इस आन अजब समाँ है
Shaikh Zahuruddin Hatim
17 likes
मुहय्या सब है अब अस्बाब-ए-होली उठो यारो भरो रंगों से झोली
Shaikh Zahuruddin Hatim
21 likes
जी उठूँ फिर कर अगर तू एक बोसा दे मुझे चूसना लब का तिरे है मुझ को जूँ आब-ए-हयात
Shaikh Zahuruddin Hatim
21 likes
Similar Writers
Our suggestions based on Shaikh Zahuruddin Hatim.
Similar Moods
More moods that pair well with Shaikh Zahuruddin Hatim's sher.







