और तो कोई बताता नहीं इस शहर का हाल इश्तिहारात ही दीवार के पढ़ कर देखें
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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
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हमारे बा'द तेरे इश्क़ में नए लड़के बदन तो चू मेंगे ज़ुल्फ़ें नहीं सँवारेंगे
Vikram Gaur Vairagi
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मुद्दतें गुज़र गई 'हिसाब' नहीं किया न जाने अब किस के कितने रह गए हम
Kumar Vishwas
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दिल ना-उमीद तो नहीं नाकाम ही तो है लंबी है ग़म की शाम मगर शाम ही तो है
Faiz Ahmad Faiz
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उसे किसी से मोहब्बत थी और वो मैं नहीं था ये बात मुझ सेे ज़ियादा उसे रुलाती थी
Ali Zaryoun
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तेरी वफ़ा में मिली आरज़ू-ए-मौत मुझे जो मौत मिल गई होती तो कोई बात भी थी
Khalilur Rahman Azmi
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सुना रहा हूँ उन्हें झूट-मूट इक क़िस्सा कि एक शख़्स मोहब्बत में कामयाब रहा
Khalilur Rahman Azmi
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कोई वक़्त बतला कि तुझ से मिलूँ मेरी दौड़ती भागती ज़िंदगी
Khalilur Rahman Azmi
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निकाले गए इस के मअ'नी हज़ार अजब चीज़ थी इक मेरी ख़ामुशी
Khalilur Rahman Azmi
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हम सा मिले कोई तो कहें उस से हाल-ए-दिल हम बन गए ज़माने में क्यूँ अपनी ही मिसाल
Khalilur Rahman Azmi
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