बातें तुम को भाती होगी इश्क़, मुहब्बत, प्यार की लेकिन क्या सुध ली है तुम ने अपने भी घर बार की
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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बड़े नादान हो तुम भी ज़रा समझा करो बातें गले मिल कर जो रोती है बिछड़ कर कितना रोएगी
Ankita Singh
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किस लिए देखती हो आईना तुम तो ख़ुद से भी ख़ूब-सूरत हो
Jaun Elia
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कुछ न रह सका जहाँ विरानियाँ तो रह गईं तुम चले गए तो क्या कहानियाँ तो रह गईं
Khalil Ur Rehman Qamar
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ज़रा ठहरो कि शब फीकी बहुत है तुम्हें घर जाने की जल्दी बहुत है ज़रा नज़दीक आ कर बैठ जाओ तुम्हारे शहर में सर्दी बहुत है
Zubair Ali Tabish
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मैं अकेला ही नहीं था इश्क़ में जो लिखे उस ने वो ख़त भी देखिए काग़ज़ी है इश्क़ अब तो मानिए काग़ज़ों पर दस्तख़त भी देखिए
Ravi 'VEER'
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जिस तरह पत्ते गिरे है शाख़ से ठीक वैसे ही गिरा हूँ यार मैं नासमझ था मैं बहुत पहले मगर अब बहुत ही सरफिरा हूँ यार मैं
Ravi 'VEER'
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तितलियों की थी ज़रूरत सो उसे रक्खा मगर वो बग़ीचे के सभी फूलों को पत्थर कर गया
Ravi 'VEER'
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शा'इरी ये हुस्न और ये इश्क़ की बातें जनाब इक समय तक ठीक है फिर छोड़ देनी चाहिए
Ravi 'VEER'
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इश्क़ पर जब शे'र लिखने बैठता हूँ आजकल मुस्कुराते लब मेरे हैं आँख रोती है मेरी
Ravi 'VEER'
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