be-sakhta bikhar gai jalwon ki kaenat aaina tut kar teri angdai ban gaya
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किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा
Ahmad Faraz
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ख़्वाबों को आँखों से मिन्हा करती है नींद हमेशा मुझ सेे धोखा करती है उस लड़की से बस अब इतना रिश्ता है मिल जाए तो बात वग़ैरा करती है
Tehzeeb Hafi
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ईद का चाँद तुम ने देख लिया चाँद की ईद हो गई होगी
Idris Azad
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जा तुझे जाने दिया जानाँ मेरी जानाँ जान अब तू हो गई अनजान हो जैसे
nakul kumar
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ये ज़ुल्फ़ अगर खुल के बिखर जाए तो अच्छा इस रात की तक़दीर सँवर जाए तो अच्छा जिस तरह से थोड़ी सी तेरे साथ कटी है बाक़ी भी उसी तरह गुज़र जाए तो अच्छा
Sahir Ludhianvi
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एक वा'दा है किसी का जो वफ़ा होता नहीं वर्ना इन तारों भरी रातों में क्या होता नहीं
Saghar Siddiqui
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दो चार दिन की बात है ये ज़िंदगी की बात दो चार दिन के प्यार का क़ाइल नहीं हूँ दोस्त
Saghar Siddiqui
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ऐ सितारों के चाहने वालो आँसुओं के चराग़ हाज़िर हैं रौनक़-ए-जश्न-ए-रंग-ओ-बू के लिए ज़ख़्म हाज़िर हैं दाग़ हाज़िर हैं
Saghar Siddiqui
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है दुआ याद मगर हर्फ़-ए-दुआ याद नहीं मेरे नग़्मात को अंदाज़-ए-नवा याद नहीं
Saghar Siddiqui
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हम फ़क़ीरों की सूरतों पे न जा हम कई रूप धार लेते हैं ज़िंदगी के उदास लम्हों को मुस्कुरा कर गुज़ार लेते हैं
Saghar Siddiqui
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