भूलने भुलाने के क़िस्से क्या बताएँ हम मतला भूल जाते हैं शे'र याद रहते हैं
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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है
Allama Iqbal
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ये मुझे चैन क्यूँ नहीं पड़ता एक ही शख़्स था जहान में क्या
Jaun Elia
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कुछ न रह सका जहाँ विरानियाँ तो रह गईं तुम चले गए तो क्या कहानियाँ तो रह गईं
Khalil Ur Rehman Qamar
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रंग जब बनकर गवाह आया तेरी तासीर का मैं ने ये आलम भी देखा है तेरी तस्वीर का
Krishnakant Kabk
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मशीनेें दुनिया-भर की भी लगा दो चाहे तुम उस के दिल का रस्ता नईं बना पाओगे
Krishnakant Kabk
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कैसे हम को अलग करोगे हम इक दूजे के मानी हैं
Krishnakant Kabk
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हाँ ये बहुत पाबन्दियों में बाँध कर रखती हमें फिर भी ग़ज़ल के जितनी अच्छी कोई महबूबा नहीं
Krishnakant Kabk
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मैं कहूँ भी तो कैसे कहूँ अब ग़ज़ल शे'र भी मेरे तन्हा हैं मेरी तरह
Krishnakant Kabk
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