बिन कहे छोड़ के न जाता तो अपनी आँखों से कुछ जताता तो कुछ तो मजबूरियाँ रही होंगी पर वो मजबूरियाँ बताता तो
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उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो न जाने किस गली में ज़िंदगी की शाम हो जाए
Bashir Badr
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तुम ने छोड़ा तो किसी और से टकराऊँगा मैं कैसे मुमकिन है कि अंधे का कहीं सर न लगे
Umair Najmi
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कोई हसीन बदन जिन की दस्तरस में नहीं यही कहेंगे कि कुछ फ़ाएदा हवस में नहीं
Umair Najmi
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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
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वो अफ़्साना जिसे अंजाम तक लाना न हो मुमकिन उसे इक ख़ूब-सूरत मोड़ दे कर छोड़ना अच्छा
Sahir Ludhianvi
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वो मुहब्बत का तलबगार नहीं हो सकता जो सितमगर है उसे प्यार नहीं हो सकता तेरे होते हुए जो चाँद का दीदार करे कुछ भी होगा वो समझदार नहीं हो सकता
Zeeshan kaavish
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उन की आँखों से जब से पी यारो छोड़ दी तब से मय-कशी यारो रात को छत से चाँद जब देखा याद उन की फिर आ गई यारो
Zeeshan kaavish
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मुहब्बत का मुहब्बत से कोई जब नाम लेता है किसी का हो गया है वो यही पैग़ाम देता है
Zeeshan kaavish
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वो ही मुझ को गिराने वाला है जिस को गिरते हुए सँभाला है दिल को पत्थर बनाया था मैं ने उस ने पत्थर भी तोड़ डाला है
Zeeshan kaavish
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तेरे जुमले तेरे क़िस्से भुला के आज आए हैं तेरी यादों के सारे ख़त जला के आज आए हैं
Zeeshan kaavish
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