चढ़ते हुवे ए शम्स दिखा ताव भी मगर ये जान ले कि शाम ढले डूब जाएगा
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ख़ुद से भी मिल न सको, इतने पास मत होना इश्क़ तो करना, मगर देवदास मत होना देखना, चाहना, फिर माँगना, या खो देना ये सारे खेल हैं, इन में उदास मत होना
Kumar Vishwas
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वो नहीं मेरा मगर उस से मोहब्बत है तो है ये अगर रस्मों रिवाजों से बग़ावत है तो है
Deepti Mishra
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सुहागन भी बता देगी मगर तुम पूछो विधवा से ये मंगलसूत्र ज़ेवर के अलावा भी बहुत कुछ है ये क्या इक मक़बरे को आख़री हद मान बैठे हो मोहब्बत संग-ए-मरमर के अलावा भी बहुत कुछ है
Zubair Ali Tabish
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मिरी ग़ज़ल की तरह उस की भी हुकूमत है तमाम मुल्क में वो सब से ख़ूब-सूरत है बहुत दिनों से मिरे साथ थी मगर कल शाम मुझे पता चला वो कितनी ख़ूब-सूरत है
Bashir Badr
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उसूली तौर पे मर जाना चाहिए था मगर मुझे सुकून मिला है तुझे जुदा कर के
Ali Zaryoun
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हर कोई सब्र की तलक़ीन किया करता है पर कोई ये तो बताए कि करूँँ मैं, कैसे?
Afzal Ali Afzal
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कुछ तो करें कि दिल ये कहीं और जा लगे कुछ देर के लिए सही आँखों को चैन हो
Afzal Ali Afzal
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ऐसी हैं क़ुर्बतें के मुझी में बसा है वो ऐसे हैं फ़ासले के नहीं राब्ता नसीब
Afzal Ali Afzal
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इक और इश्क़ की नहीं फ़ुर्सत मुझे सनम और हो भी अब अगर तो मेरा मन नहीं बचा
Afzal Ali Afzal
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इश्क़ के रंग में ऐ मेरे यार रंग आया फिर आज रंगों का तेहवार रंग हो गुलाबी या हो लाल पीला हरा आ लगा दूँ तुझे भी मैं दो चार रंग
Afzal Ali Afzal
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