इश्क़ के रंग में ऐ मेरे यार रंग आया फिर आज रंगों का तेहवार रंग हो गुलाबी या हो लाल पीला हरा आ लगा दूँ तुझे भी मैं दो चार रंग
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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ये मुझे चैन क्यूँ नहीं पड़ता एक ही शख़्स था जहान में क्या
Jaun Elia
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दुआएँ दे रहे हैं उस को ज़िंदगी की मगर हमीं हैं जिस ने कि जीना मुहाल कर दिया है
Afzal Ali Afzal
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चालीस साल इस को अकेले निभाएँगे ये चार साल का जो तअल्लुक़ था दरमियाँ
Afzal Ali Afzal
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हर कोई सब्र की तलक़ीन किया करता है पर कोई ये तो बताए कि करूँँ मैं, कैसे?
Afzal Ali Afzal
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चढ़ते हुवे ए शम्स दिखा ताव भी मगर ये जान ले कि शाम ढले डूब जाएगा
Afzal Ali Afzal
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सीने में मेरे दिल है, पर अब उस में तू नहीं या'नी तिजोरी तो है मगर धन नहीं बचा
Afzal Ali Afzal
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