चाय पीते हैं कहीं बैठ के दोनों भाई जा चुकी है ना तो बस छोड़ चल आ जाने दे
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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पूछते हैं वो कि ग़ालिब कौन है कोई बतलाओ कि हम बतलाएँ क्या
Mirza Ghalib
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सुहागन भी बता देगी मगर तुम पूछो विधवा से ये मंगलसूत्र ज़ेवर के अलावा भी बहुत कुछ है ये क्या इक मक़बरे को आख़री हद मान बैठे हो मोहब्बत संग-ए-मरमर के अलावा भी बहुत कुछ है
Zubair Ali Tabish
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हम अपनी जान के दुश्मन को अपनी जान कहते हैं मोहब्बत की इसी मिट्टी को हिंदुस्तान कहते हैं
Rahat Indori
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ज़मीं पे घर बनाया है मगर जन्नत में रहते हैं हमारी ख़ुश-नसीबी है कि हम भारत में रहते हैं
Mehshar Afridi
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हम ऐसा कहने वाले जब तलक है ग़ज़ल बंदूक़ पर भारी रहेगी
Ali Zaryoun
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अस्र के वक़्त मेरे पास न बैठ मुझ पे इक साँवली का साया है
Ali Zaryoun
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अजल से ले कर अब तक औरतों को सिवाए जिस्म क्या समझा गया है
Ali Zaryoun
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जागना और जगा के सो जाना रात को दिन बना के सो जाना
Ali Zaryoun
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मैं कुछ बता नहीं सकता वो मेरी क्या थी 'अली' कि उस को देख के बस अपनी याद आती थी
Ali Zaryoun
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