दहशत-गर्दी फैल रही है अब मज़हब के नारों से लोगों को मारा जाता है गोली से हथियारों से कौन है रहबर कौन है रहज़न सब को ख़बर है 'दानिश' अब क़ातिल को ताक़त मिलती है सत्ता के गलियारों से
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याद भूले हुए लोगों को किया जाता है भूल जाओ कि तुम्हें याद किया जाएगा
Charagh Sharma
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मेरे अंदर से आ जाओ बाहर गहमा-गहमी है एक बदन में दो लोगों को कैसे घर ले जाऊँगा
nakul kumar
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यक़ीन कर वो तिरे पास लौट आएगा जब उस का उठने लगेगा यक़ीन लोगों से
Varun Anand
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फैले हैं क़तरे ओस के घर में रोया हूँ मन मसोस के घर में मैं ने पलकें बिछाई थीं लेकिन चाँद उतरा पड़ोस के घर में
Sandeep Thakur
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हिम्मत से सच कहो तो बुरा मानते हैं लोग रो-रो के बात कहने की आदत नहीं रही
Dushyant Kumar
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हम ग़रीबों का रहनुमा है इश्क़ हम मरीज़ों की इक दवा है इश्क़ इश्क़ को वो समझ न पाएगा जो ये कहता है मसअला है इश्क़
Danish Balliavi
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तुम मेरी साँसों में बसते हो हरदम दिल मेरा क्यूँ तोड़ के हँसते हो ऐ सनम
Danish Balliavi
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तुम मेरे ख़यालों में आया करते हो फिर कुछ लम्हें यूँँ नइँ ज़ाया' करते हो
Danish Balliavi
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अपनी औक़ात व जज़्बात बता कर रख दो अपने दुश्मन की सभी हस्ती मिटा कर रख दो तुम को दिल्ली की सियासत नहीं जीने देगी ज़िंदा रहना है तो आतंक मचा कर रख दो
Danish Balliavi
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तू इस मेरे दिल के बहुत पास क्यूँ है न जाने तू मेरे लिए ख़ास क्यूँ है
Danish Balliavi
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