din ek sitam ek sitam raat karo ho wo dost ho dushman ko bhi tum mat karo ho
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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हम अपनी जान के दुश्मन को अपनी जान कहते हैं मोहब्बत की इसी मिट्टी को हिंदुस्तान कहते हैं
Rahat Indori
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बड़े नादान हो तुम भी ज़रा समझा करो बातें गले मिल कर जो रोती है बिछड़ कर कितना रोएगी
Ankita Singh
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आज का दिन भी ऐश से गुज़रा सर से पाँव तक बदन सलामत है
Jaun Elia
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तितली से दोस्ती न गुलाबों का शौक़ है मेरी तरह उसे भी किताबों का शौक़ है
Charagh Sharma
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न जाने रूठ के बैठा है दिल का चैन कहाँ मिले तो उस को हमारा कोई सलाम कहे
Kaleem Aajiz
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वो बात ज़रा सी जिसे कहते हैं ग़म-ए-दिल समझाने में इक उम्र गुज़र जाए है प्यारे
Kaleem Aajiz
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वो कहते हैं हर चोट पर मुस्कुराओ वफ़ा याद रक्खो सितम भूल जाओ
Kaleem Aajiz
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तल्ख़ियाँ इस में बहुत कुछ हैं मज़ा कुछ भी नहीं ज़िंदगी दर्द-ए-मोहब्बत के सिवा कुछ भी नहीं
Kaleem Aajiz
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सुना है हमें बे-वफ़ा तुम कहो हो ज़रा हम से आँखें मिला लो तो जानें
Kaleem Aajiz
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