दूर होते न क्यूँँ हम कहो इल्तिजा आख़िरी उस की थी
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लोग हर मोड़ पे रुक रुक के सँभलते क्यूँँ हैं इतना डरते हैं तो फिर घर से निकलते क्यूँँ हैं मोड़ होता है जवानी का सँभलने के लिए और सब लोग यहीं आ के फिसलते क्यूँँ हैं
Rahat Indori
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जौन' उठता है यूँँ कहो या'नी 'मीर'-ओ-'ग़ालिब' का यार उठता है
Jaun Elia
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पड़ी रहने दो इंसानों की लाशें ज़मीं का बोझ हल्का क्यूँँ करें हम
Jaun Elia
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हो गया ग्यारह का तो दिखने लगीं मजबूरियाँ बीस का होते ही अपनी नौजवानी छोड़ दी
nakul kumar
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ले दे के अपने पास फ़क़त इक नज़र तो है क्यूँँ देखें ज़िंदगी को किसी की नज़र से हम
Sahir Ludhianvi
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ज़िंदगी जी नहीं जाती ऐसे मौत इक रोज़ बोली गले लग
Nainsee Gupta 'Nayantara'
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प्रेम ने थामा है जब से ज़िंदगी खिल सी गई है शब्द भी सब मौन तब से ध्यान भी ख़ुद घट रहा है
Nainsee Gupta 'Nayantara'
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न आए सामने उस के कभी भी आईना कोई कि धड़कन में बसा जो है रहे आबाद दिल उस का
Nainsee Gupta 'Nayantara'
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आदमी देख कर डर रहा आदमी कौन था जानता ऐसा होगा कभी
Nainsee Gupta 'Nayantara'
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अपना हुआ करता कभी वो लग रहा है अजनबी
Nainsee Gupta 'Nayantara'
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