दूर थे दोनों कहीं पर दोनों थे छत पर खड़े चाँद को छलनी बना कर देखा फिर उस ने मुझे
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जौन तुम्हें ये दौर मुबारक, दूर ग़म-ए-अय्याम से हो एक पागल लड़की को भुला कर अब तो बड़े आराम से हो
Jaun Elia
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चाय पीते हैं कहीं बैठ के दोनों भाई जा चुकी है ना तो बस छोड़ चल आ जाने दे
Ali Zaryoun
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आज देखा है तुझ को देर के बा'द आज का दिन गुज़र न जाए कहीं
Nasir Kazmi
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ये दुख अलग है कि उस सेे मैं दूर हो रहा हूँ ये ग़म जुदा है वो ख़ुद मुझे दूर कर रहा है तेरे बिछड़ने पर लिख रहा हूँ मैं ताज़ा ग़ज़लें ये तेरा ग़म है जो मुझ को मशहूर कर रहा है
Tehzeeb Hafi
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उस ने खिड़की से चाँद देखा था मैं ने खिड़की में चाँद देखा है
Zubair Ali Tabish
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यही वो लोग जब माँगो मदद मुँह फेर लेते हैं यही वो हैं जो कहते हैं मदद कोई नहीं करता
Divya 'Kumar Sahab'
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तुम तो कहते थे कि मैं रोता नहीं हूँ कब से इतना मुस्कुराया जा रहा है
Divya 'Kumar Sahab'
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जिस दिन भूख कचोटेगी तुम तब जानोगे इक दाने का मतलब क्या क्या हो सकता है
Divya 'Kumar Sahab'
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आज़माने में यही ख़तरा रहा है कल जो अपना था कहाँ अपना रहा है
Divya 'Kumar Sahab'
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अब जिगर में दर्द है तो दर्द होने दीजिए आप लड़के को बदल कर मर्द होने दीजिए
Divya 'Kumar Sahab'
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