ek angdai se sare shahr ko nind aa gai ye tamasha main ne dekha baam par hota hua
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दिल के दरवाज़े भेड़ कर देखो जख़्म सारे उधेड़ कर देखो बंद कमरे में आईने से कभी तुम मेरा जिक्र छेड़ कर देखो
Sandeep Thakur
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सारे का सारा तो मेरा भी नहीं और वो शख़्स बे-वफ़ा भी नहीं ग़ौर से देखने पे बोली है शादी से पहले सोचना भी नहीं
Kushal Dauneria
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उल्टी हो गईं सब तदबीरें कुछ न दवा ने काम किया देखा इस बीमारी-ए-दिल ने आख़िर काम तमाम किया
Meer Taqi Meer
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तुझे कैसे इल्म न हो सका बड़ी दूर तक ये ख़बर गई तिरे शहर ही की ये शाएरा तिरे इंतिज़ार में मर गई
Mumtaz Naseem
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तेरी गली को छोड़ के पागल नहीं गया रस्सी तो जल गई है मगर बल नहीं गया मजनूँ की तरह छोड़ा नहीं मैं ने शहर को या'नी मैं हिज्र काटने जंगल नहीं गया
Ismail Raaz
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