ek takhti amn ke paigham ki tang dije unche minaron ke beach
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उस के चेहरे की चमक के सामने सादा लगा आसमाँ पे चाँद पूरा था मगर आधा लगा
Iftikhar Naseem
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फ़ासले ऐसे भी होंगे ये कभी सोचा न था सामने बैठा था मेरे और वो मेरा न था
Adeem Hashmi
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न जाने क्यूँँ गले से लगने की हिम्मत नहीं होती न जाने क्यूँँ पिता के सामने बेटे नहीं खुलते
Kushal Dauneria
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मौत ने सारी रात हमारी नब्ज़ टटोली ऐसा मरने का माहौल बनाया हम ने घर से निकले चौक गए फिर पार्क में बैठे तन्हाई को जगह-जगह बिखराया हम ने
Shariq Kaifi
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लोग हम सेे सीखते हैं ग़म छुपाने का हुनर आओ तुम को भी सिखा दें मुस्कुराने का हुनर क्या ग़ज़ब है तजरबे की भेंट तुम ही चढ़ गए तुम से ही सीखा था हम ने दिल दुखाने का हुनर
Kashif Sayyed
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मैं छुप रहा हूँ कि जाने किस दम उतार डाले लिबास मुझ को
Aziz Nabeel
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'नबील' इस इश्क़ में तुम जीत भी जाओ तो क्या होगा ये ऐसी जीत है पहलू में जिस के हार चलती है
Aziz Nabeel
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वो एक राज़ जो मुद्दत से राज़ था ही नहीं उस एक राज़ से पर्दा उठा दिया गया है
Aziz Nabeel
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एक तख़्ती अम्न के पैग़ाम की टांग दीजे ऊंचे मीनारों के बीच
Aziz Nabeel
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तमाम शहर को तारीकियों से शिकवा है मगर चराग़ की बैअत से ख़ौफ़ आता है
Aziz Nabeel
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