फ़क़ीरी को ख़ुदाई हुस्न देना है हमें 'लाजो इसी फ़ाके का हम को यार अब रोज़ा बनाना है
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न पूछो हुस्न की ता'रीफ़ हम से मोहब्बत जिस से हो बस वो हसीं है
Adil Farooqui
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मत बताना कि बिखर जाएँ तो क्या होता है नईं नस्लों को नए ख़्वाब सजाने देना
Ameer Imam
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इक कली की पलकों पर सर्द धूप ठहरी थी इश्क़ का महीना था हुस्न की दुपहरी थी ख़्वाब याद आते हैं और फिर डराते हैं जागना बताता है नींद कितनी गहरी थी
Vikram Gaur Vairagi
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हुस्न कुछ और नहीं छत की हरी काई है वक़्त-बे-वक़्त जहाँ पाँव फिसल जाता है
Ashu Mishra
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आप की सादा दिली ख़ुद आप की तौहीन है हुस्न वालों को ज़रा मग़रूर होना चाहिए
Abbas Qamar
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मत कहो मिरे हमदम ये कि राएगाँ हो तुम इक जहाँ के बंदे का, यार दो जहाँ हो तुम
Aarush Sarkaar
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मर्ज़ी से तो पैमाना, हम ने ना रखा होगा सामने कोई फ़ोटो भी रखी गई होगी
Aarush Sarkaar
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कुँए में चलो कूद जाते हैं दोनों तभी इस ज़माने को राहत बचेगी
Aarush Sarkaar
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सामने वो यूँँ मिरे डब्बा टिफ़िन का रखती थी जैसे थाली खाने की बीवी लगाकर देती है बाग के सब फूल मालन मुरझा ना जाएँ यूँ भी तू नज़र नईं डाले, बस पानी लगाकर देती है
Aarush Sarkaar
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ऐसा इक बाँकपन है उस में के नक़्ल करती है हर कली उस की
Aarush Sarkaar
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