faqat mal-o-zar-e-diwar-o-dar achchha nahin lagta jahan bachche nahin hote wo ghar achchha nahin lagta
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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क्या ख़बर कौन था वो, और मेरा क्या लगता था जिस सेे मिल कर मुझे, हर शख़्स बुरा लगता था
Tehzeeb Hafi
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ये मुझे चैन क्यूँ नहीं पड़ता एक ही शख़्स था जहान में क्या
Jaun Elia
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मैं तो ऐ इश्क़ तेरी कूज़ा-गरी जानता हूँ तू ने हम दो को मिलाया तो बना एक ही शख़्स
Abbas Tabish
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मुझ को उस की आँखों में कूदने की आदत है मैं तुम्हें बताऊँगा ख़ुद-कुशी के बारे में
Abbas Tabish
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मेरे आँसू मिरे अंदर ही गिरे रोने से जी और बोझल हो गया
Abbas Tabish
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शायद किसी बला का था साया दरख़्त पर चिड़ियों ने रात शोर मचाया दरख़्त पर
Abbas Tabish
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मैं अपने आप में गहरा उतर गया शायद मिरे सफ़र से अलग हो गई रवानी मिरी
Abbas Tabish
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