घड़ी घर की ज़रा धीरे है चलती इसे मालूम है सजना तुम्हारा
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आज पहली दफ़ा लगा मुझ को वो ज़रा बे-वफ़ा लगा मुझ को बस बिना बात ही बिगड़ता था बेवजह ही ख़फ़ा लगा मुझ को
Sandeep Thakur
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वक़्त देता था वो मिलने का तभी रक्खी थी दोस्त इक दौर था मैं ने भी घड़ी रक्खी थी
Nadir Ariz
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हम को मालूम है जन्नत की हक़ीक़त लेकिन दिल के ख़ुश रखने को 'ग़ालिब' ये ख़याल अच्छा है
Mirza Ghalib
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आदतन उस के लिए फूल ख़रीदे वरना नहीं मालूम वो इस बार यहाँ है कि नहीं
Abbas Tabish
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बड़े नादान हो तुम भी ज़रा समझा करो बातें गले मिल कर जो रोती है बिछड़ कर कितना रोएगी
Ankita Singh
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वो बिल्कुल फूल सी बच्ची है यारो सड़क पर फूल लेकिन बेचती है
Shriyansh Qaabiz
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यहाँ सब लोग रोते ही मिले हैं कहानी इतनी अच्छी जा रही है
Shriyansh Qaabiz
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किसी का दिल बहुत रौशन हुआ है किसी के दिल में जाले लग रहे हैं
Shriyansh Qaabiz
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तुम ने जिस घर को हिस्सों में बाँटा है बीस बरस लगते हैं इक बनवाने में
Shriyansh Qaabiz
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इसी पर बैठ कर शब भर कहानी माँ सुनाती थी तभी ख़ुशबू सी आती है मुझे इस चारपाई से
Shriyansh Qaabiz
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