तुम ने जिस घर को हिस्सों में बाँटा है बीस बरस लगते हैं इक बनवाने में
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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ये मुझे चैन क्यूँ नहीं पड़ता एक ही शख़्स था जहान में क्या
Jaun Elia
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यहाँ सब लोग रोते ही मिले हैं कहानी इतनी अच्छी जा रही है
Shriyansh Qaabiz
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किसी का दिल बहुत रौशन हुआ है किसी के दिल में जाले लग रहे हैं
Shriyansh Qaabiz
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वो बिल्कुल फूल सी बच्ची है यारो सड़क पर फूल लेकिन बेचती है
Shriyansh Qaabiz
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मिरे किरदार का मरना ही शायद कहानी की ज़रूरत बन गया था
Shriyansh Qaabiz
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इसी पर बैठ कर शब भर कहानी माँ सुनाती थी तभी ख़ुशबू सी आती है मुझे इस चारपाई से
Shriyansh Qaabiz
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