घर ख़ाली है रो सकता हूँ या'नी ख़ुद का हो सकता हूँ अब तुम,मेरा हाथ पकड़ लो मैं दुनिया में खो सकता हूँ
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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ख़ुद से भी मिल न सको, इतने पास मत होना इश्क़ तो करना, मगर देवदास मत होना देखना, चाहना, फिर माँगना, या खो देना ये सारे खेल हैं, इन में उदास मत होना
Kumar Vishwas
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मैं क्या कहूँ के मुझे सब्र क्यूँँ नहीं आता मैं क्या करूँँ के तुझे देखने की आदत है
Ahmad Faraz
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तुम्हारे नाम की हर लड़की से मिला हूँ मैं तुम्हारा नाम फ़क़त तुम पे अच्छा लगता है
Unknown
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हाथ ख़ाली है तेरे शहर से जाते जाते जान होती तो मेरी जान लुटाते जाते
Rahat Indori
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मिले तो पूछना यारों ख़ुदा से वफ़ा होती नहीं क्यूँँ आदमी से
Vijay Anand Mahir
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हाल अपना छुपा नहीं पाते लोग जो मुस्कुरा नहीं पाते घर हमारा जला दिया के हम घर किसी का जला नहीं पाते
Vijay Anand Mahir
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वक़्त ने कुछ ऐसा घेरा क्या करें मन बहुत था तेरा मेरा क्या करें
Vijay Anand Mahir
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ख़ुशी तो बस ज़रा सी रह गई है उदासी ही उदासी रह गई है बदन की प्यास सारी मिट गई पर हमारी रूह प्यासी रह गई है
Vijay Anand Mahir
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सब-के-सब तेरे ही तो बंदे हैं इक बराबर दे बांटने वाले
Vijay Anand Mahir
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