गुड़ सीं मीठा है बोसा तुझ लब का इस जलेबी में क़ंद ओ शक्कर है
sherKuch Alfaaz
Faez Dehlvi12 Likes
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घर में भी दिल नहीं लग रहा काम पर भी नहीं जा रहा जाने क्या ख़ौफ़ है जो तुझे चूम कर भी नहीं जा रहा रात के तीन बजने को है यार ये कैसा महबूब है जो गले भी नहीं लग रहा और घर भी नहीं जा रहा
Tehzeeb Hafi
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इसीलिए तो मैं रोया नहीं बिछड़ते समय तुझे रवाना किया है जुदा नहीं किया है
Ali Zaryoun
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तेरा चुप रहना मेरे ज़ेहन में क्या बैठ गया इतनी आवाज़ें तुझे दीं कि गला बैठ गया
Tehzeeb Hafi
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उल्फ़त से दुनिया का बैर पुराना है फिर भी दीवाने को शे'र सुनाना है सबका कर्ज अदा कर के लौटा हूँ मैं बस इक लड़की का बोसा लौटाना है
Rohit Gustakh
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तुझ को बतलाता मगर शर्म बहुत आती है तेरी तस्वीर से जो काम लिया जाता है
Tehzeeb Hafi
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