गुज़र जाएँगे जब कई साल तो सोचा तेरे दुख से उभर जाऊँगा लेकिन नईं
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वो ज़माना गुज़र गया कब का था जो दीवाना मर गया कब का
Javed Akhtar
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हाथ ख़ाली है तेरे शहर से जाते जाते जान होती तो मेरी जान लुटाते जाते
Rahat Indori
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मुद्दतें गुज़र गई 'हिसाब' नहीं किया न जाने अब किस के कितने रह गए हम
Kumar Vishwas
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हज़ारों साल नर्गिस अपनी बे-नूरी पे रोती है बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदा-वर पैदा
Allama Iqbal
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मैं ने जो कुछ भी सोचा हुआ है, मैं वो वक़्त आने पे कर जाऊँगा तुम मुझे ज़हर लगते हो और मैं किसी दिन तुम्हें पी के मर जाऊँगा
Tehzeeb Hafi
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वही गुज़रेगी आख़िर में 'करन' मुझ पर जो गुज़री आज तक हर एक आशिक़ पे
karan singh rajput
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नया दिन कोई आएगा तेरी इस ज़िन्दगी में भी 'करन' कब तक रुलायेगी तेरी किस्मत तुझे ऐसे
karan singh rajput
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कि हम लड़के है हम पर ही ब'अद में दोष आना है मोहब्बत करता है तो कर पर अपना भी मुनाफ़ा देख
karan singh rajput
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कि हम इक सिक्के के दो पहलू है ऐ दोस्त वो नफ़रत करता है, मैं प्यार करता हूँ
karan singh rajput
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उस सेे शिकायत होती है जिस सेे मुहब्बत होती है ख़ुद रूठना ख़ुद मानना लड़की की आदत होती है
karan singh rajput
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