hum ne hans hans ke teri bazm mein ai paikar-e-naz kitni aahon ko chhupaya hai tujhe kya malum
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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हम को मालूम है जन्नत की हक़ीक़त लेकिन दिल के ख़ुश रखने को 'ग़ालिब' ये ख़याल अच्छा है
Mirza Ghalib
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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अब किसे है दिमाग़-ए-तोहमत-ए-इश्क़ कौन सुनता है बात फूलों की
Makhdoom Mohiuddin
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हम ने हँस हँस के तेरी बज़्म में ऐ पैकर-ए-नाज़ कितनी आहों को छुपाया है तुझे क्या मालूम
Makhdoom Mohiuddin
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रात भर दर्द की शम्अ' जलती रही ग़म की लौ थरथराती रही रात भर
Makhdoom Mohiuddin
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आप की याद आती रही रात भर चश्म-ए-नम मुस्कुराती रही रात भर
Makhdoom Mohiuddin
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