हम वो महरूम-ए-तमन्ना कि भरी दुनिया में अपने हिस्से की मुहब्बत भी नहीं कर पाए
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हज़ारों साल नर्गिस अपनी बे-नूरी पे रोती है बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदा-वर पैदा
Allama Iqbal
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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ले दे के अपने पास फ़क़त इक नज़र तो है क्यूँँ देखें ज़िंदगी को किसी की नज़र से हम
Sahir Ludhianvi
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ज़रा ठहरो कि शब फीकी बहुत है तुम्हें घर जाने की जल्दी बहुत है ज़रा नज़दीक आ कर बैठ जाओ तुम्हारे शहर में सर्दी बहुत है
Zubair Ali Tabish
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क्यूँ डरें ज़िन्दगी में क्या होगा कुछ न होगा तो तजरबा होगा
Javed Akhtar
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झुक के मिलना मेरी आदत नहीं मजबूरी है मैं ने अहबाब के एहसान उठाए हुए हैं
Sarwar Khan Sarwar
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बहुत बनाएँगे लेकिन कभी नहीं बनेगी पुरानी चीज़ दोबारा नई नहीं बनेगी वो झुर्रियाँ तो बना लेंगे मेरे चेहरे की मुसव्विरों से मेरी बेबसी नहीं बनेगी
Sarwar Khan Sarwar
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जो मेरा दुख है वही सारे जहाँ का दुख है दिल कहीं और लगा हो गई शादी कहीं और
Sarwar Khan Sarwar
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इक निशानी भी फ़रामोश नहीं की उस की एक भी ज़ख़्म को आराम नहीं आने दिया
Sarwar Khan Sarwar
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तू ने इक दिन हमें नाकाम कहा और हम ने ख़ुद को अपने भी किसी काम नहीं आने दिया
Sarwar Khan Sarwar
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